About Us

Sanjivini Drishti NGO is a humanitarian organization dedicated to improving the eye health and vision of students and citizens across the country. Our mission is to help individuals reduce their dependency on spectacles and regain natural, healthy eyesight through holistic and traditional wellness practices.

At Sanjivini Drishti, we believe that true vision goes beyond the physical eye — it is about clarity, balance, and overall well-being. Guided by ancient Indian wisdom, modern wellness science, and compassionate service, we provide awareness, education, and eye-care programs that promote natural vision improvement.

कक्षा में बैठे हुए चश्में लगाए बच्चों को देखकर मन में यह विचार आया जब पशु पक्षियों को चश्मे की आवश्यकता नहीं है फिर यह छोटे-छोटे मासूम बच्चों को चश्मे की जरूरत क्यों पड़ रही है ।इस विचार को लेकर 2004 में DAV स्कूल सेक्टर 37 फरीदाबाद में 45 दिन का कैंप लगाया गय।”योग द्वारा चश्मे से मुक्ति प्रयास शिविर ” ।इस शिविर में 56 बच्चों में से लगभग 36 बच्चों का चश्मा उतरा जो उसे समय की मीडिया आज तक टीवी चैनल, आस्था टीवी चैनल, संस्कार टीवी चैनल पर दिखाया गया ।फरीदाबाद के प्रिंट मीडिया दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक ट्रिब्यून आदि अखबारों के माध्यम से प्रचार प्रसार हुआ । यद्यपि कुछ बच्चों को चश्मा किसी को 6 महीने बाद या 1 साल बाद चश्मा पुनः लगा बाकी शेष बच्चे जो संपर्क में थे उनकी सूचना के आधार पर उन्हें चश्मा दोबारा नहीं लगा। यह उस समय मेडिकल साइंस के लिए आश्चर्य करने वाली बात थी।उसके बाद हमने 10 दिवसीय के कहीं कैंप लगाए उनका ही परिणाम बहुत अच्छा निकला । कहीं बाहर धन के अभाव में यह कैंप जिस लक्ष्य पर पहुंचना चाहिए था उसे पर नहीं पहुंचा । तो अब इसी कारण यह संकल्प को हम पूरी ऊर्जा के साथ करने का और आने वाले साल में संजीवनी दृष्टि ट्रस्ट के माध्यम से इसको लक्ष्य तक पहुंचाएंगे।
जिस की अनेक लोगों की नेत्र ज्योति की जो समस्या उसको दूर करने का प्रयास करेंगे और योग जिससे भारतीय संस्कृति का लोग लोहा एवं मानेंगे इसकी उपयोगिता सिद्ध होगी। इसलिए मैं अमन सिंह शास्त्री यह आवाहन करता हूं कि संजीवनी दृष्टि ट्रस्ट में जुड़कर मासूम बच्चों की नेत्र ज्योति बढ़ाने में सहयोग करे और पुण्य के भागी बने ।
मुझे अपने अनुभव से विश्वास है कि जिन बच्चों को चश्मा लगा हुआ है उनको तीन दिन में ही आराम शुरू हो जाता है और 10 दिन के शिविर में कहानी बच्चों के चश्मा उतर जाते हैं।

“आखें है तो जहान है वरना श्मशान हैं”

-Founder Acharya Aman Singh Shastri